चौपाई दोहा सोरठा की परिभाषा और पहचान

चौपाई दोहा सोरठा की परिभाषा और पहचान

चौपाई दोहा सोरठा की परिभाषा हिंदी व्याकरण competitive exam group C aur D class 10 में 1 या 2 क्वेश्चन पूछे जाते हैं चौपाई , दोहा,  सोरठा परिभाषा और उदाहरण के लिए 1या 2 अंक निर्धारित हे। इससे पहले हम उपसर्ग और प्रत्यय में पड़ चुके हैं।

 

 

 चौपाई दोहा सोरठा की परिभाषा


चौपाई दोहा सोरठा की परिभाषा

 
No. चौपाई दोहा सोरठा
1. चौपाई की परिभाषा
2. दोहा की परिभाषा
3. सोरठा की परिभाषा
4. चौपाई के उदाहरण
5. दोहा के उदाहरण
6. सोरठा के उदाहरण
7. चौपाई के पहचान/ट्रिक
8. दोहा की पहचान/ट्रिक
9. सोरठा की पहचान/ट्रिक

दोहा की परिभाषा और पहचान-

यह अर्ध सम मात्रिक छंद है इसके 4 चरण होते हैं इसके सम चरणों 11,11 मात्रा होती हैं विषम चरणों में 13,13 मात्राएं होती हैं!
 
दोहा के उदाहरण-
 
 

              ऽ ऽ  ऽ ऽ   ऽ ऽ ।   ।।   ऽ   ऽ ऽ   ऽ ।

             ऐसी वानी बोलिए, मन का आपा खोय।
               ऽ ।।  ऽ   ऽ ।।   । ऽ    ऽ ।।   ऽ ।।   ऽ।
             औरन को शीतल करे, आपॅहु शीतल होय!
 
श्री हनुमान चालीसा उदाहरण
 
          श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।
 
           बरनउ रघुवर विमल जस, जो दायक फल चारि।
 
उदाहरण-
 
पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरती रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहिं सुरभूप।।
 
chaupa kii paribhasha
Chaupai ki paribhasha
 
चौपाई की परिभाषा और पहचान-
यह सम मात्रिक छंद होता है इसमें 4 चरण होते हैं
हर चरण में 16,16 मात्राएं होती है! पहले चरण की तुुक दूसरे से तथा तीसरेेेेे चरण की चौथेेे चरण से मिलती हैं। 
 
 
चौपाई के उदाहरण
 
            ।।    । ऽ ऽ।  ऽ ।  ऽ।  ऽ ।।
            जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
 
            जय कपीश तिॅहु लोक उजागर
            ऽ।   ऽ।   । ऽ ऽ ।  । । ऽ ऽ
            राम दूत अतुलित बलधामा
 
            अंजनी पुत्र पवन सुतनामा।
 
उदाहरण-
 
            बदउऺ गुरु पद पदुम परागा।
 
           सुरुचि सुबास सरस अनुराधा।।
 
           अमिय मूरिमय चूरन चारू।
 
           समन सकल भव रुज परिवारू।।

उदाहरण-

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा।।

गरल सुधा रिपु अमिय मिताई। गोपद सिंधु अनल सिलाई।।

सोरठा की परिभाषा और उदाहरण
सोरठा
 
सोरठा की परिभाषा और पहचान-
दोहा के ठीक विपरीत के सम चरणों में 13,13 मात्रा तथा विषम चरणों में 11,11 मात्राएं होती है!
 
सोरठा के उदाहरण
 
ऽ ।   ऽ ।  ऽ ऽ ।    ।।   ।।।  ॥   ॥   । । ।
मूक होय वाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन।
 ऽ ।   । ऽ   ऽ। । ऽ ।   । । । । । ।   ॥   ॥    ।।।
जासु कृपा सो दयाल ,द्रवउ सकल कलमल दहन
 
उदाहरण-2
 
जो सुमिरत सिधि होइ गननायक करिवर बदन !

 

करहु अनुग्रह सोई, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन

रोला की परिभाषा-
रोला मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएं होती हैं। प्रत्येक चरण में 11 तथा 13 मात्राएं होती हैं। प्रत्येक चरण के अंत में दो गुरु या लघु वर्ण आते हैं।
 
उदाहरण-
 
हे देवी, यह नियम, सृष्टि में सदा अटल है,
रह सकता है वही सुरक्षित, जिसमें बल है।
निर्बल का है नहीं जगत में, कहीं ठिकाना,
रक्षा साधन उसे प्राप्त हो, चाहे नाना।।
 
छन्द किसे कहते हैं Chhand kise kahate hain 
 
जिन रचनाओं में वर्ण, मात्रा, यति, गति, कुक आदि पर बल दिया जाता है उसे छन्द कहते हैं। 
 
छन्द कितने प्रकार के होते हैं Chhand ke kitne prakar  hote hain 
 
छन्द के 3 प्रकार होते हैं-
  1. वर्णिक छन्द
  2. मात्रिक छन्द
  3. मुक्तक छन्द

Qus-1 दोहा चौपाई और सोरठा में कितनी मात्राएं होती हैं?

1.दोहा में सम चरणों 11,11 मात्रा होती हैं विषम चरणों में 13,13 मात्राएं होती हैं!

2.चौपाई के हर चरण में 16,16 मात्राएं होती है!

3.सोरठा सम चरणों में 13,13 मात्रा तथा विषम चरणों में 11,11 मात्राएं होती है!

Qus-2 दोहा की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए।

यह अर्ध सम मात्रिक छंद है इसके 4 चरण का होते हैं इसके सम चरणों 11,11 मात्रा होती हैं विषम चरणों में 13,13 मात्राएं होती हैं!
 
उदाहरण
              ऽ ऽ  ऽ ऽ   ऽ ऽ ।   ।।   ऽ   ऽ ऽ   ऽ ।
             ऐसी वानी बोलिए, मन का आपा खोय।
               ऽ ।।  ऽ   ऽ ।।   । ऽ    ऽ ।।   ऽ ।।   ऽ।
             औरन को शीतल करे, आपॅहु शीतल होय!

Qus-3 चौपाई की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए?

यह सम मात्रिक छंद होता है इसमें 4 चरण होते हैं
हर चरण में 16,16 मात्राएं होती है!

उदाहरण
            बदउऺ गुरु पद पदुम परागा।
 
           सुरुचि सुबास सरस अनुराधा।।
 
           अमिय मूरिमय चूरन चारू।
 
           समन सकल भव रुज परिवारू।।

Qus-4 सोरठा की परिभाषा उदाहरण सहित बताइए?

दोहा के ठीक विपरीत के सम चरणों में 13,13 मात्रा तथा विषम चरणों में 11,11 मात्राएं होती है!
 
उदाहरण-1
ऽ ।   ऽ ।  ऽ ऽ ।    ।।   ।।।  ॥   ॥   । । ।
मूक होय वाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन।
 ऽ ।   । ऽ   ऽ। । ऽ ।   । । । । । ।   ॥   ॥    ।।।
जासु कृपा सो दयाल ,द्रवउ सकल कलमल दहन

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